114 राफेल फाइटर जेट की डील पर होगी अहम बैठक, फ्रांसीसी राष्ट्रपति के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय का प्लान तैयार

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की संभावित भारत यात्रा से पहले भारतीय रक्षा मंत्रालय भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर चर्चा कर सकता है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव हाल ही में रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत प्रारंभिक मंजूरी हासिल कर चुका है और अब इसे आगे की रणनीतिक मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मेगा डिफेंस डील को “Make in India” मॉडल से जोड़े जाने की भी संभावना है, जिसमें विमानों का एक बड़ा हिस्सा भारत में निर्माण या असेंबली के जरिए तैयार किया जा सकता है। इससे देश की रक्षा क्षमता मजबूत होने के साथ-साथ घरेलू एयरोस्पेस इंडस्ट्री को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारतीय वायु सेना के फाइटर बेड़े का विस्तार अत्यंत आवश्यक हो गया है। भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर संभावित खतरे के मद्देनजर अपनी एयर पावर मजबूत करनी होगी।

भारतीय वायु सेना की स्वीकृत फाइटर स्क्वाड्रन संख्या 42 है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे काफी पीछे है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अलग-अलग समय पर यह संख्या लगभग 29 से 31 स्क्वाड्रन के बीच रही है, जो स्वीकृत स्तर से काफी कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने विमानों की रिटायरमेंट और नई टेक्नोलॉजी आधारित विमानों की जरूरत के कारण यह गैप और बढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, मिग-21 जैसे पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, जिससे स्क्वाड्रन की संख्या और कम होने का खतरा बना रहता है।

रक्षा रणनीति से जुड़े अधिकारियों का यह भी मानना है कि भविष्य में वायु सेना को 42 स्क्वाड्रन से भी अधिक क्षमता की जरूरत पड़ सकती है, क्योंकि अब सुरक्षा चुनौतियां केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चीन जैसे बड़े सैन्य शक्ति वाले देश के साथ संभावित टकराव की आशंका भी रणनीति में शामिल है।

114 राफेल विमानों की संभावित खरीद को इसी रणनीतिक गैप को भरने के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह डील आगे बढ़ती है, तो यह भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल क्षमता, स्ट्राइक रेंज और मल्टी-रोल फाइटिंग क्षमता को काफी हद तक मजबूत कर सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं जैसे तेजस और AMCA के साथ विदेशी प्लेटफॉर्म का संतुलित उपयोग ही भारत की एयर डिफेंस रणनीति की रीढ़ बनेगा।
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Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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