जनपद में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बड़ा निर्णय लिया है। डीएम ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगले 10 दिनों के भीतर सभी शासकीय कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से ही फाइलों का संचालन सुनिश्चित किया जाए। फरवरी माह के बाद किसी भी स्तर पर मैनुअल फाइल स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि डिजिटल फाइल प्रणाली लागू होने के बाद कागजी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि ई-ऑफिस व्यवस्था को निर्धारित समयसीमा के भीतर लागू कर उसकी अनुपालन आख्या एक सप्ताह के अंदर कैंप कार्यालय में प्रस्तुत करें।
दैनिक जनसुनवाई भी अनिवार्य
इसके साथ ही डीएम ने प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के लिए जनसुनवाई व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी, नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी समेत जनपद के समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक अपने-अपने कार्यालयों में अनिवार्य रूप से जनसुनवाई करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित समाधान प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नियमित जनसुनवाई से न केवल आमजन की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण होगा, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
ई-ऑफिस प्रणाली और अनिवार्य जनसुनवाई के इस संयुक्त निर्णय को जनपद में सुशासन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे पारदर्शी और संवेदनशील शासन व्यवस्था स्थापित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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