सुप्रीम कोर्ट 16 फरवरी को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े कथित शूटिंग वीडियो प्रकरण पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत की कार्यसूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष होगी।
इससे पहले 10 फरवरी को अदालत ने वाम दलों के नेताओं की ओर से दायर याचिका को सूचीबद्ध करने की सहमति दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने आगामी असम विधानसभा चुनावों का भी उल्लेख किया था और कहा कि राजनीतिक संघर्ष का एक हिस्सा अक्सर अदालत के बाहर भी लड़ा जाता है।
विवादित वीडियो का मामला
यह वीडियो 7 फरवरी को असम भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से साझा किया गया था। इसमें मुख्यमंत्री सरमा कथित रूप से राइफल से निशाना साधते और फायर करते दिख रहे थे। वीडियो के वायरल होने के तुरंत बाद इस पर व्यापक राजनीतिक आलोचना और सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप लगे। विवाद के बाद वीडियो को हटा दिया गया।
इस वीडियो प्रकरण ने राजनीतिक दलों और सामाजिक मीडिया में व्यापक चर्चा को जन्म दिया। विपक्षी दलों ने इसे असामाजिक और संवेदनशील बताया, जबकि सरकार ने इसे कृषि और खेल अभ्यास से जुड़ा सामान्य वीडियो करार दिया।
सुनवाई के महत्व
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई राजनीतिक विवाद और कानून के दृष्टिकोण से दोनों के लिए अहम मानी जा रही है। अदालत इस मामले में यह तय कर सकती है कि वीडियो का सार्वजनिक रूप से साझा होना कानूनन कितनी संवेदनशीलता रखता है और क्या किसी प्रकार का अवैध प्रचार या गलत संदेश फैलाया गया।
विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है कि यह सुनवाई असम विधानसभा चुनावों के ठीक पहले हो रही है, जिससे राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक महत्व भी जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी माहौल में अस्थिरता पैदा करने वाला बताया, वहीं समर्थक इसे नियमित प्रशिक्षण और खेल अभ्यास के रूप में देख रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का परिणाम न केवल राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है, बल्कि यह भविष्य में सोशल मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी को लेकर भी मानक स्थापित कर सकता है।#हिमंतबिस्वासरमा #असमवीडियो #सुप्रीमकोर्टसुनवाई #शूटिंगवीडियो