रात होते ही सड़कों पर दौड़ते मौत के डंपर
शहर से ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों पर रात 10 बजे के बाद डंपरों की बेलगाम रफ्तार लोगों में दहशत पैदा कर रही है। तेज गति से दौड़ते ये भारी वाहन अन्य वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
सड़क पर चल रहे बाइक, साइकिल और कार सवार अक्सर इनकी चपेट में आकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।
80-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, बिना ब्रेक पार करते चौराहे
स्थानीय लोगों के अनुसार, डंपर चालक 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाते हैं। चौराहों और मोड़ों पर भी वे रफ्तार कम नहीं करते, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
कई मामलों में डंपर चालक अन्य वाहनों को रगड़ते हुए निकल जाते हैं और टक्कर मारने के बाद मौके से फरार हो जाते हैं।
हर दूसरे दिन हादसे, बाइक-साइकिल सवार सबसे ज्यादा शिकार
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लगभग हर दूसरे या तीसरे दिन कोई न कोई साइकिल या बाइक सवार इन डंपरों की चपेट में आकर घायल हो जाता है या अपनी जान गंवा देता है।
रात के समय तेज रफ्तार में चलने वाले ये वाहन सड़क सुरक्षा के नियमों की खुलकर धज्जियां उड़ा रहे हैं।
नंबर प्लेट गायब या मिट्टी से ढकी, पहचान मुश्किल
इन डंपरों पर या तो नंबर प्लेट नहीं होती या फिर उस पर इतनी मिट्टी जमी होती है कि पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि हादसे के बाद आरोपी वाहन चालक आसानी से बच निकलते हैं।
यह प्रवृत्ति कानून व्यवस्था और ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़े करती है।
खनन सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप, कार्रवाई का अभाव
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई डंपर खनन माफिया से जुड़े होते हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती।
अगर कभी कोई वाहन पकड़ा भी जाता है, तो प्रभावशाली नेटवर्क के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है।
प्रशासनिक सख्ती की जरूरत
लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए जरूरी है कि प्रशासन रात के समय विशेष अभियान चलाकर इन डंपरों की जांच करे। साथ ही, स्पीड कंट्रोल, नंबर प्लेट सत्यापन और सख्त दंडात्मक कार्रवाई जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।#RoadSafety #Dumpers #AccidentNews #TrafficRules #BreakingNews #IndiaNews