Dwarahat Malyaal Village: दो दशक से नशामुक्त होली, बनी मिसाल

द्वाराहाट विकासखंड के मल्याल गांव ने बीते दो दशकों से नशामुक्त होली मनाने की परंपरा को कायम रखते हुए एक अनूठी मिसाल पेश की है। यहां होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन, सांस्कृतिक मूल्यों और आपसी भाईचारे का प्रतीक बन चुकी है।

गांव के बुजुर्गों द्वारा वर्षों पहले खींची गई मर्यादा की रेखा आज भी अक्षुण्ण है, जिसे नई पीढ़ी भी पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा रही है। मल्याल गांव में होली के दौरान किसी भी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

यहां की होली परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों से समृद्ध होती है। बैठकी होली के बाद खड़ी होली का भव्य आयोजन किया जाता है, जिसमें होल्यार पारंपरिक रागों में घर-घर जाकर होली गीत गाते हैं। यह परंपरा गांव की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाती है।

गांव में होली गायन की शुरुआत धार्मिक स्थलों से होती है। सबसे पहले कालिका मंदिर, भूमिया मंदिर और एड़ी मंदिर में पारंपरिक होली गीत गाए जाते हैं। इसके बाद पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन जाता है।

छलड़ी के दिन होली को पूरे गांव में घुमाया जाता है। इस दौरान बुजुर्ग लोगों द्वारा आशीर्वाद दिया जाता है और सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाता है। यह परंपरा गांव के लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है।

ग्राम सभा द्वारा करीब 20 वर्ष पहले लिया गया नशामुक्त होली का संकल्प आज भी पूरी सख्ती के साथ लागू है। यह पहल न केवल गांव के भीतर अनुशासन बनाए रखने में सफल रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

मल्याल गांव की यह परंपरा दिखाती है कि सामूहिक संकल्प और सामाजिक जागरूकता से त्योहारों को सकारात्मक और अनुशासित तरीके से मनाया जा सकता है।#Holi #DrugFreeHoli #Uttarakhand #Dwarahat #VillageNews #Culture #Tradition #India

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

Leave a Comment

शहर चुनें