NCERT की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील और विवादित विषय को शामिल किए जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस सामग्री को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी जिन विशेषज्ञों पर थी, उनकी भूमिका क्या रही। जानकारी के अनुसार, इस पाठ्यपुस्तक के निर्माण, विषय चयन, समीक्षा और अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया में कुल 57 विषय विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भागीदारी थी।
इन विशेषज्ञों का दायित्व था कि वे पाठ्यपुस्तक में शामिल सामग्री की गहन जांच करें, उसकी प्रासंगिकता और संतुलन का मूल्यांकन करें, और यह सुनिश्चित करें कि छात्रों के लिए प्रस्तुत सामग्री उचित और तथ्यपरक हो। हालांकि, इस मामले में यह जिम्मेदारी निभाने में चूक के आरोप सामने आ रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि पहली नजर में यह मामला गंभीर लापरवाही का प्रतीत होता है। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में शामिल विषयवस्तु की बहु-स्तरीय समीक्षा की जाती है, लेकिन इसके बावजूद यदि विवादित कंटेंट शामिल हो गया, तो यह जांच प्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की सामग्री को शामिल करने से पहले उसके सामाजिक और शैक्षणिक प्रभावों का मूल्यांकन जरूरी होता है। खासकर स्कूल स्तर की किताबों में ऐसे विषयों को बेहद सावधानी और संतुलन के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि इस विवाद के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या संबंधित विशेषज्ञों या प्रक्रिया में शामिल अन्य पक्षों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।#NCERT #EducationNews #BookControversy #Judiciary #SchoolEducation #IndiaNews