केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की। साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हाल ही में हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक देश में बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य बताया।
जम्मू में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए अठावले ने कहा कि 11 मार्च को फारूक अब्दुल्ला पर हुआ हमला दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला हमेशा जम्मू-कश्मीर और भारत के बाकी हिस्सों के बीच मजबूत संबंधों के समर्थक रहे हैं। विचारधारात्मक मतभेद हो सकते हैं लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना जरूरी है और किसी को भी किसी की जान लेने का अधिकार नहीं है।केंद्र सरकार हिंसा के खिलाफ
अठावले ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फारूक अब्दुल्ला से बात कर उनकी सुरक्षा और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश में किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ है और शांति बनाए रखना चाहती है। नक्सलवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं होता। अगर न्याय के लिए लड़ाई में लोगों की हत्या की जाती है तो इससे समाज और खुद का ही नुकसान होता है।