संसद में चुनाव आयुक्त के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस महाभियोग प्रस्ताव लेकर आई है। इस पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि राजनीतिक नेताओं, दलों के बयानों को लेकर हम किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होना चाहते।
उन्होंने कहा, “आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले कुछ सरकारों के फैसलों को लेकर मैं पहले ही साफ कर चुका हूं कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में, राज्य और केंद्र सरकारें अपने विवेक से कोई भी नीतिगत और दूसरे निर्णय ले सकती हैं, जो उन्हें उचित लगता हो।”चुनाव आयुक्त ने कहा कि लेकिन एक बार जब आचार संहिता लागू हो जाती है, तो कोई भी ऐसा निर्णय जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित करता हो या किसी तरह के प्रलोभन के रूप में काम करता हो, उसकी अनुमति नहीं होती।