टीबी मुक्त भारत अभियान की कड़ी में हरियाणा की 2157 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है। इनमें से 211 पंचायतों को स्वर्ण, 646 पंचायतों को रजत तथा 1300 पंचायतों को कांस्य श्रेणी में प्रमाणपत्र मिला है।
राज्य में कुल 6237 पंचायतें हैं। इस तरह लगभग 35 प्रतिशत पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं। अंबाला टीबी मुक्त 191 पंचायतों के साथ अभियान में सबसे आगे है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व टीबी दिवस (24 मार्च 2023) को वाराणसी से “टीबी मुक्त पंचायत” पहल की शुरुआत की थी।इस पहल का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को क्षय रोग से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से समझने, उसके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने और पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ टीबी उन्मूलन में उनके योगदान को प्रोत्साहित करना था।पिछले तीन वर्षों में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस कार्यक्रम के जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन को दर्शाती है। वर्ष 2023 में राज्य की 574 पंचायतों को टीबी मुक्त होने का प्रमाणपत्र मिला था और सभी पंचायतें कांस्य श्रेणी में थीं, जो कुल पंचायतों का लगभग 9 प्रतिशत था।
वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1855 पंचायतों तक पहुंच गई, जिनमें 1542 कांस्य तथा 313 रजत श्रेणी की पंचायतें शामिल रही, जो राज्य की लगभग 30 प्रतिशत पंचायतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 2157 पंचायतों तक पहुंच गई है।
पहल के अंतर्गत पंचायतों को तीन स्तरों पर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। किसी पंचायत को एक वर्ष तक टीबी-मुक्त स्थिति बनाए रखने पर कांस्य, दो वर्षों तक रजत और तीन वर्षों तक यह स्थिति बनाए रखने पर स्वर्ण प्रमाणपत्र दिया जाता है।
प्रमाणपत्र प्रत्येक वर्ष विश्व टीबी दिवस के अवसर पर उपायुक्त द्वारा जारी किए जाते हैं और इनकी वैधता एक वर्ष की होती है। छह मानकों पर ख्ररी उतरने और जिला विकास और पंचायती राज अधिकारी, सिविल सर्जन और उप सिविल सर्जन से हरी झंडी मिलने के बाद ही किसी पंचायत को टीबी-मुक्त घोषित किया जाता है।