क्या आप जानते हैं मां दुर्गा को कैसे प्राप्त हुआ सुदर्शन चक्र? पढ़ें महिषासुर वध से जुड़ी है ये कथा

 चैत्र नवरात्र के पहले दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र नवरात्र में धरती पर मां दुर्गा का आगमन होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से हुई है। इन नौ दिनों में भक्त आदिशक्ति मां भवानी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत भी रखते हैं।

इससे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। मां दुर्गा का रूप अद्भुत है। मां दुर्गा सिंह की सवारी करती हैं और हाथ में कमल, त्रिशूल, चक्र, तलवार आदि लिए हुए है। भगवान विष्णु ने मां दुर्गा को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। यह कथा महिषासुर के वध और देवी दुर्गा के प्राकट्य से जुड़ी है। आइए पढ़ते हैं कथा।महिषासुर का आतंक और मां दुर्गा का प्राकट्य

पौराणिक कथा के अनुसार, जब शक्तिशाली असुर ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था। तब सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महादेव की शरण में पहुचें। उन्होंने महिषासुर के अत्याचारों के बारे में बताया गया, जिसको सुनकर त्रिदेवों को क्रोध आया। इसके बाद उनके क्रोध से अधिक उग्र तेज प्रकट हुआ। इसके अलावा सभी देवताओं के शरीर से भी तेज निकला। इसके बाद यह तेज देवी के रूप में परिवर्तित हो गया,जिसे मां दुर्गा के नाम से जाना गया।महिषासुर से युद्ध करने के लिए सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र मां दुर्गा को भेंट किया। वहीं, जगत के पालनहार भगवन विष्णु ने सुदर्शन चक्र को उत्पन्न किया और मां दुर्गा को प्रदान किया। यह चक्र धर्म की रक्षा का प्रतीक है। सुदर्शन चक्र का उल्लेख मार्कंडेय पुराण’ के ‘दुर्गा सप्तशती’ में किया गया। मां दुर्गा के हाथ में सुदर्शन चक्र निरंतर घूमता रहता है, जिसे समय का प्रतीक माना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है, तो सभी शक्तियां एक होकर देवी के रूप उस संकट का नाश करती हैं।

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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