रामपुर में 43 एकड़ में बनेगी रजा लाइब्रेरी, बनेगा विश्व स्तरीय अध्ययन केंद्र

1774 में स्थापित रजा लाइब्रेरी एवं संग्रहालय जल्द विश्वस्तरीय अध्ययन केंद्र बनेगा। यहां विश्व की तमाम भाषाएं भी पढ़ाई जाएंगी। इसके लिए अब तक रामपुर किले के पांच एकड़ हिस्से में फैली लाइब्रेरी का किले की पूरी 43 एकड़ भूमि में विस्तार होगा।

लाइब्रेरी में पांडुलिपियों के अलावा चित्रकला, सुलेख तथा अन्य कई दुर्लभ धरोहर संरक्षित हैं। इन ज्ञान एवं संस्कृति की जीवंत परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित एवं प्रोत्साहित करते हुए लाइब्रेरी को कला, शिक्षा एवं धरोहर संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।इस कड़ी में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) और आइआइटी रुड़की लाइब्रेरी के भवनों का सुरक्षा आडिट कर रिपोर्ट पुस्तकालय निदेशक डा.पुष्कर मिश्रा व जिला प्रशासन को सौंप चुका है। परिसर से दो सरकारी विद्यालय स्थानांतरित हो चुके हैं।

लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, उद्यान विभाग, एलआइयू कार्यालय को शिफ्ट करने का नोटिस भी हाल में जारी किये गए हैं। वहीं, राजस्व विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रजा पुस्तकालय को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।

पुस्तकालय बोर्ड की अध्यक्ष राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 15 अक्टूबर 2024 को किले की पूरी भूमि रजा लाइब्रेरी को सौंपने का निर्णय लिया था। 

इसके बाद सीपीडब्ल्यूडी को रामपुर किले का विस्तृत सर्वेक्षण करने और पुस्तकालय के प्रमुख भवनों का संरचनात्मक सुरक्षा आडिट करने की जिम्मेदारी आइआइटी रुड़की को सौंपी गई थी। कार्यालय शिफ्ट होने के साथ ही एनओसी मिलते ही पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

वहां से कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही पुस्तकालय को व्यापक रूप दिया जाएगा। लाइब्रेरी के नए रंग-रूप और कार्यों का विस्तृत मसौदा भी एक-दो दिन में जारी होने की उम्मीद है।

महत्व : रजा लाइब्रेरी में 17,000 पांडुलिपियां हैं। सातवीं से 19वीं शताब्दी तक की 500 से अधिक कुरान की प्रतियां हैं। इनमें से लगभग 300 सोने के पानी से लिखी व सजाई गई हैं। ऊंट की खाल पर प्रारंभिक ‘कूफी’ लिपि में सातवीं शताब्दी में लिखी गई विशेष कुरान यहां की सबसे बड़ी धरोहरों में से एक है।

पूरे विश्व में ऐसी केवल दो प्रतियां हैं। जिनमें एक यहां और दूसरी इराक में है। फारसी भाषा में अनुवादित और चित्रों से सुसज्जित रामायण की अत्यंत दुर्लभ कृति व 60,000 से अधिक मुद्रित पुस्तकें यहां संरक्षित हैं। मंगोलिया का इतिहास भी मौजूद है।

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