नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सरकारी विभाग के पास मंदिर से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, तो केवल यह कहकर जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि संबंधित मंदिर ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं है।
आयोग ने यह निर्देश पुडुचेरी के हिंदू धार्मिक संस्थान एवं वक्फ विभाग को देते हुए कहा कि सरकारी विभाग अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। यदि मांगी गई जानकारी विभाग के अभिलेखों में उपलब्ध है, तो उसे RTI अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मंदिर के बजट और प्रशासनिक रिकॉर्ड मांगे गए थे
यह मामला पुडुचेरी स्थित श्री वेदपुरीश्वरर श्री वरदराजपेरुमल देवस्थानम मंदिर से जुड़े अभिलेखों की मांग से संबंधित है।
एक आरटीआई आवेदक ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच के निम्नलिखित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था—
- मंदिर के वार्षिक बजट का विवरण।
- ऑडिट रिपोर्ट।
- मंदिर की संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज।
- प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों का ब्योरा।
- उन शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी।
सरकारी विभाग की जिम्मेदारी तय
सुनवाई के दौरान केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि यदि किसी सरकारी विभाग के पास किसी धार्मिक संस्थान से संबंधित प्रशासनिक या वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, तो वह केवल इस आधार पर सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता कि संबंधित संस्थान स्वयं RTI अधिनियम के तहत ‘पब्लिक अथॉरिटी’ की श्रेणी में नहीं आता।
आयोग ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी अभिलेखों में मौजूद जानकारी तक नागरिकों की पहुंच सुनिश्चित करना है। ऐसे में विभाग को उपलब्ध रिकॉर्ड कानून के अनुरूप उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनानी होगी।
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां धार्मिक संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड सरकारी विभागों के पास सुरक्षित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश सरकारी अभिलेखों की पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करेगा।#RTI #CIC #RightToInformation #Temple #Transparency #Governance #LegalNews #HindiNews