‘निंबोड़ा’ से ‘लाल-पीली अंखियां’ तक: राजस्थान के मंगणियारों का संगीत कैसे पहुंचा बॉलीवुड?

राजस्थान की लोक संस्कृति और संगीत ने बॉलीवुड को कई ऐसे सदाबहार गीत दिए हैं, जो आज भी हर शादी, उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम की शान बने हुए हैं। ‘निंबोड़ा-निंबोड़ा’ से लेकर ‘लाल-पीली अंखियां’ जैसे लोकप्रिय गीतों की जड़ें राजस्थान के थार मरुस्थल और वहां के प्रसिद्ध मंगणियार समुदाय की समृद्ध संगीत परंपरा से जुड़ी हैं।

मंगणियार समुदाय अपनी अनूठी गायन शैली और लोक संगीत के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इस समुदाय के बारे में प्रचलित है कि यहां बच्चे बोलना सीखने से पहले सुर और संगीत की शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर देते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उनकी सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बनी हुई है।

राजपूत राजाओं के संरक्षण में विकसित हुई परंपरा

‘मंगणियार’ शब्द का अर्थ माना जाता है ‘मांगकर जीवनयापन करने वाला’। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर जिलों में रहने वाला यह समुदाय ऐतिहासिक रूप से राजपूत शासकों और बड़े व्यापारिक परिवारों के संरक्षण में रहा। ये लोग दरबारी लोक कलाकार और संगीतकार के रूप में कार्य करते थे तथा अपने गीतों के माध्यम से राजाओं की वीरता, वंशावली, इतिहास और युद्धों की गाथाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखते आए हैं।

लोक संगीत से बॉलीवुड तक का सफर

समय के साथ मंगणियार समुदाय का पारंपरिक संगीत राजस्थान की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचा। उनकी धुनों और लोक गायन शैली ने बॉलीवुड संगीतकारों को भी गहराई से प्रभावित किया। यही वजह है कि राजस्थान के लोक संगीत से प्रेरित कई गीत हिंदी फिल्मों में शामिल हुए और आज भी लोगों की पसंद बने हुए हैं।

मंगणियार कलाकार आज देश-विदेश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रस्तुतियां देकर राजस्थान की लोक विरासत को नई पहचान दिला रहे हैं। उनका संगीत न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि यह राजस्थान के इतिहास, संस्कृति और लोक परंपराओं का जीवंत दस्तावेज भी माना जाता है।#Manganiyar #Rajasthan #FolkMusic #Bollywood #RajasthaniMusic #IndianCulture #LokSangeet #Heritage #HindiNews #Culture

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