मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म का मशहूर सावन गीत ‘बन्ना रे बाग में झूला घाल्या’ जुड़ा है राजस्थान के लोकगीत से

सावन का महीना आते ही झूले, हरियाली और लोकगीतों की परंपरा जीवंत हो उठती है। इसी दौरान एक ऐसा गीत भी खूब याद किया जाता है, जिसे कई पीढ़ियों ने सुना और पसंद किया है। साल 1999 में रिलीज हुई मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘गंगा की कसम’ का लोकप्रिय गीत ‘बन्ना रे बाग में झूला घाल्या’ आज भी सावन के दिनों में सुनाई देता है।

यह गीत केवल एक फिल्मी गाना नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। दरअसल, यह गीत राजस्थान के पारंपरिक लोकगीतों की शैली और भावनाओं से प्रेरित है, जिसमें सावन में झूला झूलने की परंपरा और बन्ना-बन्नी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

राजस्थानी लोकगीतों में सावन का विशेष महत्व रहा है। बारिश के मौसम में महिलाएं समूह में गीत गाती हैं, झूले डालती हैं और अपने मन के भावों को लोकधुनों के माध्यम से व्यक्त करती हैं। ‘बन्ना रे बाग में झूला घाल्या’ गीत में भी इसी परंपरा की मिठास और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई देती है।

राजस्थान की बन्ना-बन्नी परंपरा में विवाह, प्रेम, रिश्तों और उत्सवों से जुड़े कई लोकगीत गाए जाते हैं। इन गीतों में पारिवारिक भावनाओं के साथ-साथ मौसम और प्रकृति का भी सुंदर चित्रण मिलता है। यही वजह है कि यह फिल्मी गीत आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।

सावन के झूलों और लोक संगीत की परंपरा को बॉलीवुड तक पहुंचाने वाला यह गीत राजस्थान की लोक विरासत की एक खूबसूरत मिसाल है।SawanSong #RajasthaniFolkSong #BollywoodSongs #GangaKiKasam #MithunChakraborty #LokGeet

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