सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने न्यायपालिका में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आत्ममंथन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कॉलेजियम के कुछ हालिया फैसलों में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। उनके अनुसार, इस स्थिति से ऐसे उम्मीदवारों के न्यायपालिका में प्रवेश की आशंका बढ़ सकती है, जो उपयुक्त नहीं हैं और आगे चलकर असंवैधानिक टिप्पणियां करने जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि उन्होंने कॉलेजियम के पिछले तीन निर्णयों का अवलोकन किया, जिनमें किसी प्रकार का कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह कदम पारदर्शिता के सिद्धांत से पीछे हटने जैसा नहीं है।
उन्होंने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अपने निर्णयों के साथ संक्षिप्त ही सही, लेकिन कारण जरूर सार्वजनिक करता था। भले ही वे विस्तृत नहीं होते थे, फिर भी इससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती थी और जनता का विश्वास मजबूत होता था।
न्यायमूर्ति भुइयां ने संकेत दिया कि न्यायिक नियुक्तियों जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना न्यायपालिका की विश्वसनीयता और संस्थागत मजबूती के लिए आवश्यक है। उनके इस बयान के बाद कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है।#SupremeCourt #JusticeUjjalBhuyan #Collegium #Judiciary #Transparency #IndiaNews #LegalNews #SupremeCourtNews #BreakingNews #HindiNews