देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड स्थित खरांटी गांव निवासी जगतपति की वीरता आज भी ग्रामीणों के लिए गर्व का विषय है। पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के लिए निकले जगतपति ने अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों का सामना करते हुए देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया था।
जगतपति की शहादत की कहानी जब गांव के लोग सुनाते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। ग्रामीणों के लिए वे आज भी देशभक्ति और बलिदान की मिसाल हैं।
शहीद का पैतृक घर हुआ जर्जर
विडंबना यह है कि जिस वीर सपूत ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की परवाह नहीं की, आज उनके पैतृक गांव खरांटी में उनका घर पूरी तरह जर्जर होकर गिर चुका है।
वर्तमान में जगतपति के परिवार का कोई भी सदस्य गांव में नहीं रहता है। ऐसे में उनके बलिदान की यादों से जुड़ा उनका पैतृक आवास भी उपेक्षा का शिकार हो गया है।
ग्रामीण आज भी जगतपति के बलिदान को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले ऐसे वीर सपूतों की स्मृतियों को संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और शहादत से प्रेरणा ले सकें।Jagtapati #Aurangabad #Bihar #FreedomFighter #IndependenceDay #FreedomStruggle #BiharNews #Shaheed #IndianHistory #Independence