हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला बाईपास के पैकेज-2 में भट्टाकुफर के पास फोरलेन हाईवे निर्माण के दौरान कथित लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण कंपनी मैसर्स गावर शिखा हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को फटकार लगाते हुए प्रभावित महिला को तत्काल मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।
चमियाणा में भूस्खलन से ढहा था चार मंजिला मकान
मामला शिमला ग्रामीण के चमियाणा स्थित संजय वन कॉलोनी का है। यहां एनएच-5 से जुड़ने वाले फोरलेन हाईवे के निर्माण के लिए पहाड़ों की खड़ी कटाई की जा रही थी। आरोप है कि निर्माण के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण 30 जून 2025 को इलाके में भीषण भूस्खलन हुआ।
भूस्खलन की चपेट में आने से रंजना नामक महिला का चार मंजिला मकान पूरी तरह ढह गया। मकान के मलबे में तब्दील होने से महिला को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
NHAI और निर्माण कंपनी को फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने निर्माण कार्य से जुड़े सुरक्षा उपायों और कथित लापरवाही को लेकर NHAI तथा निर्माण कंपनी के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने प्रभावित महिला को मुआवजा देने में देरी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल भुगतान का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा की जिम्मेदारी से संबंधित एजेंसियां बच नहीं सकतीं। अदालत के आदेश के बाद अब प्रभावित महिला को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।#HimachalPradesh #Shimla #ShimlaBypass #HighCourt #HimachalHighCourt #NHAI #FourLaneHighway #Landslide #ShimlaNews #HimachalNews