चंडीगढ़ में मेयर चुनाव की तारीख पर विवाद, प्रशासन और राजनीतिक दलों में मतभेद क्यों? वजह आप भी जानें

आम आदमी पार्टी की दो महिला पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद अब मेयर चुनाव की तारीख को लेकर विवाद छिड़ गया है। डीसी ऑफिस जनवरी के अंतिम सप्ताह में चुनाव करवाने का निर्णय ले रहा है तो भाजपा और कांग्रेस पहले की तरह एक जनवरी को ही मेयर चुनाव करवाने की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक दलों का कहना है कि अंतिम कार्यकाल में मेयर बनने वाले पर काम करने का कम समय बचता है।

एक्ट के अनुसार मेयर चुनाव जनवरी माह में होना अनिवार्य है। साल 2014 तक मेयर चुनाव एक जनवरी को ही होता था। उसके बाद तत्कालीन सांसद किरण केयर ने अपनी उपस्थिति को लेकर मेयर चुनाव की तारीख आगे बढावा दी थी। कांग्रेस नेता सतीश कैंथ का कहना है कि भाजपा के मेयर चुनाव को लेकर अपनाए गए दोहरे मापदंड अब सार्वजनिक रूप से सवालों के घेरे में आ गए हैं।कैंथ ने कहा कि एक तरफ भाजपा यह दावा कर रही है कि मेयर चुनाव एक जनवरी में ही कराए जाने चाहिए तो दूसरी तरफ यह तथ्य सामने आया है कि भाजपा की ही पूर्व सांसद किरण खेर ने पूर्व में प्रशासन से मेयर चुनाव की तारीख बढ़ाने की अपील की थी। प्रशासन ने इस अपील को स्वीकार करते हुए उसी अनुरूप कदम उठाए, जिससे नगर निगम अधिनियम की भावना को ठेस पहुंची।

पूर्व उप महापौर सतीश कैथ ने कहा कि संविधान और कानून को अपनी सुविधा के अनुसार मोड़ना और फिर अपने ही रुख से पलट जाना भाजपा की दोहरी नीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान नगर निगम के चुनाव हमेशा अधिनियम और संवैधानिक प्रविधानों की सच्ची भावना के अनुरूप कराए गए, न कि किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक लाभ के आधार पर।


सतीश कैथ ने स्पष्ट किया कि उनका और उनकी पार्टी का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। नगर निगम अधिनियम के अनुसार महापौर चुनाव एक जनवरी को ही कराए जाने चाहिए, ताकि जो भी महापौर निर्वाचित हो, उसे पूरे एक वर्ष का कार्यकाल मिले और वह शहर के विकास तथा जनहित के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। चुनाव को राजनीतिक स्वार्थ के बजाय विधि के अनुसार कराना ही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।

भाजपा नेता ने प्रशासक को लिखा पत्र

भाजपा के पूर्व पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने यूटी प्रशासक को एक विस्तृत पत्र लिखकर मांग की है कि नगर निगम के महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर के चुनाव प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को ही सुनिश्चित रूप से कराए जाएं, ताकि निर्वाचित पदाधिकारियों को संविधान और कानून की मंशा के अनुरूप पूर्ण एक वर्ष का प्रभावी कार्यकाल प्राप्त हो सके।

देवशाली ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान प्रथा के तहत अक्सर इन चुनावों की तिथि जनवरी माह के उत्तरार्द्ध या अंत में तय की जाती है, जिसके चलते महापौर एवं अन्य शीर्ष पदाधिकारियों को व्यावहारिक रूप से एक वर्ष से कम अवधि के लिए ही पद पर कार्य करने का अवसर मिलता है, जो न केवल निगम प्रशासन की स्थिरता को प्रभावित करता है, बल्कि दीर्घकालिक विकास योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल असर डालता है।
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Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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