रथ सप्तमी पर सूर्यदेव की आराधना, आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ का विशेष महत्व

सूर्यदेव को ग्रहों का राजा माना जाता है और इस बार रथ सप्तमी का पर्व रविवार, 25 जनवरी को मनाया जा रहा है। चूंकि रविवार का दिन स्वयं भगवान सूर्य को समर्पित होता है, इसलिए इस बार रथ सप्तमी का महत्व और भी बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

इस अवसर पर श्रद्धालु सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। महर्षि अगस्त्य द्वारा भगवान श्रीराम को युद्धभूमि में दिया गया यह स्तोत्र शत्रुओं पर विजय, मानसिक शांति और आयु वृद्धि का साधन माना जाता है।

आदित्य हृदय स्तोत्र विनियोग
ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषिः अनुष्टुप्छन्दः
आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता
निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः।
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्।।

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा।।

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्।
येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे।।

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्।।

सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्।
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्।।

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Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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