सरकारी स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के थानाभवन ब्लॉक क्षेत्र के एक गांव में इस चुनौती से निपटने के लिए अपनाया गया नवाचार अब मिसाल बन रहा है। गांव अहाता गोसगढ़ स्थित कंपोजिट विद्यालय में ग्राम प्रधान की एक अनोखी पहल ने न सिर्फ बच्चों की उपस्थिति बढ़ाई, बल्कि शिक्षा को लेकर ग्रामीणों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव ला दिया।
दरअसल, नवंबर 2025 तक इस विद्यालय की स्थिति अन्य सामान्य सरकारी स्कूलों जैसी ही थी, जहां नियमित उपस्थिति बनाए रखना प्रशासन और शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती था। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से ग्राम प्रधान संगीता रोड ने तीन महीने पहले एक नई योजना की घोषणा की।
योजना के तहत यह ऐलान किया गया कि जो भी छात्र लगातार तीन महीने तक 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराएगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा। खास बात यह रही कि इनाम वितरण के लिए लॉटरी सिस्टम अपनाया गया, जिससे बच्चों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा दोनों देखने को मिली।
इस पहल का असर बेहद सकारात्मक रहा। तीन महीने की अवधि में कुल 41 छात्रों ने शत-प्रतिशत उपस्थिति पूरी की। लॉटरी के माध्यम से एक छात्र को वॉशिंग मशीन पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई, जबकि शेष 40 छात्रों को 500 रुपये तक के प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गए।
विद्यालय प्रशासन और ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रयोग ने न सिर्फ बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया, बल्कि अभिभावकों में भी शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर यह पहल अब शिक्षा सुधार के एक प्रभावी मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जिसे अन्य गांवों में भी लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।GovernmentSchool
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