केरल हाईकोर्ट: गुस्से में कहे गए शब्द ‘जा मर जा’ आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं

केरल हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि पति-पत्नी गुस्से में एक-दूसरे से ‘जा मर जा’ जैसे शब्द कहते हैं, तो इसे आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि आरोपी ने जानबूझकर आत्महत्या के लिए उकसाने का इरादा किया था। केवल गुस्से में कही गई बातों को कानूनी रूप से उकसावे की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

क्या है पूरा मामला

यह मामला एक महिला और उसकी छोटी बेटी से संबंधित है, जिन्होंने कथित तौर पर पति द्वारा डांटे जाने के बाद आत्महत्या कर ली।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के पति का किसी दूसरी विवाहित महिला से अवैध संबंध था। जब मृतक महिला को इस बारे में जानकारी मिली तो उसने पति से सवाल किया। इसी को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई।

कहासुनी के दौरान पति ने कथित तौर पर गुस्से में अपशब्द कहे, जिसके बाद महिला ने आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में धारा 306 के तहत अपराध तभी माना जाएगा जब यह साबित हो कि आरोपी ने जानबूझकर आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। गुस्से में कहे गए शब्दों को कानूनी रूप से पर्याप्त सबूत नहीं माना जा सकता।#KeralaHighCourt #IPC306 #CourtVerdict #FamilyDispute #LegalNews

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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