शहर को मास्टर प्लान के तहत विकसित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले जम्मू विकास प्राधिकरण (Jammu Development Authority – JDA) की स्थिति गंभीर होती जा रही है। जेडीए के अधीन आने वाली करीब 20 प्रतिशत जमीन पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण होने के कारण न तो योजनाबद्ध विकास हो पा रहा है और न ही प्रस्तावित परियोजनाओं को जमीन मिल पा रही है। इसका सीधा असर शहर की विकास योजनाओं और मास्टर प्लान के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में जेडीए की लगभग 16,467 कनाल जमीन पर अवैध कब्जे दर्ज हैं। यह कुल उपलब्ध जमीन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। जेडीए के पास शहर क्षेत्र में कुल 80,976 कनाल भूमि है, लेकिन बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के चलते इसका उपयोग योजनागत विकास के लिए नहीं किया जा पा रहा।
जमीनों की कमी के कारण सरकारी आवासीय परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा योजनाओं को लागू करने में जेडीए को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्राधिकरण की ओर से अतिक्रमण हटाने और जमीन को मुक्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मामले न्यायालयों में लंबित होने के कारण ठोस परिणाम सामने नहीं आ पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अवैध कब्जों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में जम्मू शहर के सुनियोजित विकास पर और गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। मास्टर प्लान की मूल भावना को बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त और समयबद्ध कदम उठाने की आवश्यकता है।
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