आईआईटी कानपुर के वर्ष 1976 बैच के पूर्व छात्रों ने अपने स्वर्ण जयंती मिलन समारोह के दौरान संस्थान के विकास, नवाचार और शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए 13.40 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। इस योगदान को संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पूर्व छात्रों का यह सहयोग आईआईटी कानपुर में अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकी परियोजनाओं को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संस्थान प्रशासन का कहना है कि इस राशि का उपयोग शिक्षा, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन प्रोजेक्ट्स को विस्तार देने में किया जाएगा।
पहले भी कर चुके हैं ऐतिहासिक सहयोग
खास बात यह है कि इसी बैच ने करीब 25 वर्ष पहले भी संस्थान के लिए धनराशि जुटाई थी। उस समय जुटाई गई राशि का उपयोग आईआईटी कानपुर में आर्टिफिशियल हार्ट यानी कृत्रिम हृदय प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए किया गया था। इस प्रोजेक्ट ने मेडिकल टेक्नोलॉजी रिसर्च के क्षेत्र में संस्थान को नई पहचान दिलाई।
संस्थान ने जताया आभार
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह बैच संस्थान के गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का यह सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर रिसर्च अवसर तैयार करेगा।
रीयूनियन में ताजा हुई पुरानी यादें
गोल्डन जुबली रीयूनियन कार्यक्रम में शामिल हुए पूर्व छात्र मुक्तेश पंत ने बताया कि 25 साल पहले भी बैच ने एक बड़ी राशि दी थी, जिसे संस्थान ने सही दिशा में निवेश किया। उसी निवेश से आर्टिफिशियल हार्ट रिसर्च की मजबूत नींव रखी गई थी।
उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर ने उन्हें विश्वस्तरीय शिक्षा और पहचान दी है, इसलिए संस्थान के विकास में योगदान देना उनके लिए गर्व की बात है।
शिक्षा और रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व छात्रों का यह सहयोग देश में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक प्रेरणा है। इससे न सिर्फ रिसर्च प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी, बल्कि तकनीकी नवाचार को भी नया आयाम मिलेगा।#IITKanpur #AlumniDonation #EducationNews #ResearchFunding #Innovation #ArtificialHeart #IndiaEducation