मतदाता सूची में ‘लॉजिकल डिस्क्रिप्शन’ जांच शुरू, असंगत प्रविष्टियां होंगी दुरुस्त

निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत अब ‘लॉजिकल डिस्क्रिप्शन’ प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज उन तकनीकी त्रुटियों और तर्कहीन प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें सुधारना है, जो सामान्य डेटा पैटर्न के आधार पर संदिग्ध या असंभव प्रतीत होती हैं।

आयोग के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई स्थानों पर डेटा एंट्री से जुड़ी त्रुटियां सूची की शुद्धता को प्रभावित कर रही हैं। इन्हें व्यवस्थित तरीके से चिन्हित करने के लिए अब सॉफ्टवेयर आधारित विश्लेषण और तार्किक मिलान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

किस तरह की प्रविष्टियां होंगी जांच के दायरे में

उदाहरण के तौर पर यदि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति की आयु 15 वर्ष दर्शाई गई है और उसी के नाम पर किसी मतदाता का पिता दर्ज है, तो यह स्पष्ट रूप से डेटा एंट्री की गलती मानी जाएगी। इसी प्रकार एक ही व्यक्ति के साथ छह या उससे अधिक मतदाताओं को बच्चों के रूप में जोड़े जाने जैसी असामान्य प्रविष्टियां भी संदेह के दायरे में रहेंगी।

इस प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों को चिन्हित कर संबंधित बूथ स्तर अधिकारी (BLO) और निर्वाचन कर्मियों द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। आवश्यक होने पर दस्तावेजों के आधार पर संशोधन या सुधार की कार्रवाई की जाएगी।

मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने पर जोर

निर्वाचन आयोग का कहना है कि ‘लॉजिकल डिस्क्रिप्शन’ प्रक्रिया का मकसद किसी पात्र मतदाता को सूची से हटाना नहीं, बल्कि तकनीकी त्रुटियों को दूर कर मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। इससे भविष्य में चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की भ्रम या विवाद की स्थिति कम होगी।

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के अंतर्गत यह कदम पारदर्शिता और डेटा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच और संशोधन की प्रक्रिया समयबद्ध एवं निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए।#ElectionCommission #SIR #VoterList #LogicalDescription #ElectoralRoll #ElectionUpdate #DataVerification #IndiaElections

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

Leave a Comment

शहर चुनें