सीजेआइ सूर्यकांत: न्याय प्रणाली हाशिए पर पड़े व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए

न्याय प्रणाली हाशिए पर पड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे: सीजेआइ सूर्यकांत

नई दिल्ली: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने न्याय को सुलभ, व्यावहारिक और मानवीय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली केवल कानूनी रूप से सक्षम या शक्तिशाली व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसे हाशिए पर पड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना चाहिए।

सीजेआइ सूर्यकांत ने यह विचार कॉमनवेल्थ ज्यूडिशियल एजुकेटर्स (CJE) की 11वीं द्विवार्षिक बैठक में साझा किया। उन्होंने कहा कि न्यायिक नेतृत्व को केवल प्रशासनिक अधिकार या संस्थागत पदानुक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे बौद्धिक और नैतिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए।

तकनीकी और मानवीय संवेदना का संगम

CJI सूर्यकांत ने न्याय प्रक्रिया में तकनीकी नवाचार और मानवीय संवेदना के संतुलन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अदालतों को केवल कानूनी निर्णयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि न्याय के सकारात्मक प्रभाव को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए।

उनका मानना है कि न्यायिक नेतृत्व केवल पद या अधिकार से नहीं, बल्कि विचार, नैतिकता और दृष्टिकोण के माध्यम से परिभाषित होता है। इसके तहत न्यायाधीशों को समाज के कमज़ोर और हाशिए पर पड़े वर्गों की जरूरतों को समझना और संवेदनशील निर्णय देना चाहिए।

न्याय की सुलभता और व्यावहारिकता

सीजेआइ ने इस बात पर भी जोर दिया कि न्याय प्रणाली को सुलभ और व्यावहारिक बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच केवल अधिकारियों या बड़े पदों तक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से पिछड़े और कमजोर वर्गों तक भी होनी चाहिए।

न्यायिक नेतृत्व का नैतिक आयाम

सूर्यकांत ने न्यायिक नेतृत्व के नैतिक और बौद्धिक आयाम पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि न्यायपालिका का नेतृत्व केवल निर्णय देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे समाज के प्रति उत्तरदायित्व और नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

सीजेआइ का यह संदेश न्यायपालिका और न्यायिक अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक के रूप में देखा जा रहा है, ताकि न्याय केवल कानून की किताबों में सीमित न रहकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।#सीजेआइसूर्यकांत #न्यायप्रणाली #मानवीयन्याय #हाशिएपरव्यक्ति #न्यायिकनेतृत्व

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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