आधुनिकता के इस दौर में, जहाँ शादियों के रीति-रिवाज बदल रहे हैं, वहीं भारत के हिमालयी क्षेत्रों में एक प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ दुर्गम इलाकों में बहुपति विवाह (Polyandry) की प्रथा मौजूद है, जिसमें परिवार के सभी भाई मिलकर एक ही युवती से विवाह करते हैं। यह परंपरा हमें सीधे द्वापर युग की याद दिलाती है।
हालिया घटना ने सबको चौंकाया
हाल ही में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ट्रांस-गिरी क्षेत्र में इस प्रथा का एक अनोखा उदाहरण सामने आया। यहाँ हट्टी समुदाय के दो सगे भाइयों ने एक ही युवती के साथ सात फेरे लिए।
शादी समारोह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कई दिनों तक चला और इसमें पूरे गाँव ने भाग लिया। विशेष बात यह रही कि यह विवाह किसी दबाव में नहीं, बल्कि दूल्हों और दुल्हन की आपसी रजामंदी से संपन्न हुआ।
स्थानीय भाषा में इस प्रथा को “जोड़ीदार” या “जजदा” कहा जाता है।
हिमालयी क्षेत्रों में यह प्रथा न केवल सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, बल्कि पारिवारिक संपत्ति और सामाजिक संरचना को संतुलित रखने का भी माध्यम मानी जाती है।
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