नरेंद्र मोदी ने रविवार देर रात देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े शीर्ष निर्णय लेने वाली समिति, सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की। इस अहम बैठक में पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात और उसके भारत पर संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई।
ईरान-इजरायल संघर्ष पर गहन मंथन
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से उत्पन्न स्थिति का आकलन करना था। खास तौर पर अमेरिका-इजरायल के हमलों और उसके बाद क्षेत्र में बने युद्ध जैसे हालात पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया।
भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर फोकस
बैठक में विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित निकासी (Evacuation Plan) पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए वैकल्पिक योजनाओं और लॉजिस्टिक तैयारियों की समीक्षा की गई।
रणनीतिक तैयारी और आपात योजना पर चर्चा
सीसीएस बैठक में इस बात पर भी विचार हुआ कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत को किन रणनीतिक और कूटनीतिक कदमों की जरूरत होगी। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी आकलन किया गया।
यूएई के साथ एकजुटता का संदेश
इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के साथ इस कठिन समय में एकजुटता व्यक्त करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।
वैश्विक तनाव के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं। भारत सरकार एक ओर जहां अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में प्रयास कर रही है।#CCSMeeting #Modi #MiddleEastCrisis #IranIsrael #IndiaDiplomacy #EvacuationPlan #GlobalSecurity