मिडिल ईस्ट तनाव से उछला क्रूड ऑयल, 100 डॉलर तक पहुंचने की आशंका

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। रविवार को ओवर द काउंटर (OTC) बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 10 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हालात और बिगड़ सकते हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी पहुंच सकती हैं।


क्या है ‘ओवर द काउंटर’ ट्रेडिंग?

कच्चे तेल के संदर्भ में ओवर द काउंटर (OTC) ट्रेडिंग का मतलब है कि सौदा किसी केंद्रीकृत एक्सचेंज के बजाय सीधे खरीदार और विक्रेता के बीच होता है। आमतौर पर MCX या NYMEX जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग होती है, लेकिन OTC में यह प्रक्रिया अलग होती है।

इस प्रणाली में सौदे की शर्तें—जैसे कीमत, डिलीवरी की तारीख और मात्रा—दोनों पक्ष आपसी सहमति से तय करते हैं। यह एक विकेंद्रीकृत बाजार होता है, जहां लचीलापन अधिक होता है, लेकिन पारदर्शिता अपेक्षाकृत कम होती है।


100 डॉलर का स्तर क्यों अहम?

विश्लेषकों के अनुसार, यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है या सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता घट सकती है। ऐसे में कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे वैश्विक महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और ऊर्जा खर्च पर सीधा असर पड़ता है, जिसका प्रभाव भारत जैसे आयातक देशों पर अधिक पड़ता है।


भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई पर पड़ सकता है। साथ ही, चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और रुपए पर भी दबाव बढ़ सकता है।#CrudeOil #BrentCrude #OilPrice #MiddleEastCrisis #IranIsrael #GlobalMarket #Inflation

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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