उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित फालैन गांव में हर वर्ष होने वाला होलिका दहन देशभर में अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस बार भी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जब एक माह से तपस्या कर रहे संजू पंडा धधकती होलिका से सकुशल बाहर निकले, तो पूरे गांव में “भक्त प्रह्लाद” के जयकारों से माहौल गूंज उठा।
इस अद्भुत आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशी श्रद्धालुओं ने भी इस अनोखी परंपरा का साक्षात्कार किया।
दशकों पुरानी परंपरा, आस्था का अनूठा स्वरूप
फालैन गांव की यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। यहां केवल एक होलिका नहीं, बल्कि आसपास के 11 गांवों की होलिका एक साथ प्रज्वलित की जाती है। इस दौरान पंडा समाज का एक चयनित युवक धधकती आग के बीच से होकर गुजरता है, जिसे भक्त प्रह्लाद की आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखा जाता है।
एक माह की तपस्या के बाद निभाई परंपरा
इस वर्ष लगातार दूसरे साल संजू पंडा ने यह कठिन अनुष्ठान निभाया। इसके लिए उन्होंने एक माह पहले ही अपना घर छोड़ दिया था और गांव के बाहर स्थित प्रह्लाद मंदिर में कठोर तपस्या में लीन रहे।
होलिका दहन से पहले 24 घंटे का अखंड हवन और पूजन भी किया गया, जिसके बाद परंपरा के अनुसार उन्होंने धधकती अग्नि के बीच प्रवेश किया और सकुशल बाहर निकल आए।
देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु
फालैन की इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी हजारों लोग इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बने। विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।
यह परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति में विश्वास और धार्मिक परंपराओं की गहराई को भी दर्शाती है।#Mathura #HolikaDahan #Holi2026 #Falain #ReligiousIndia #Prahlad #FestivalOfColors