राज्य के इंजीनियरिंग और पालीटेक्निक कालेजों में संचालित लैंग्वेज लैब की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई संस्थानों में पिछले पांच महीने के दौरान एक भी छात्र ने लॉगिन नहीं किया है। केंद्रीय मॉनिटरिंग में इस गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ है।
स्थिति यह है कि अधिकांश कालेजों में सॉफ्टवेयर स्थापित होने के बावजूद लैब का उपयोग नहीं हो रहा है। बिना किसी अतिरिक्त सर्वर की जरूरत के यह सुविधा उपलब्ध है, लेकिन फिर भी छात्र इससे दूर हैं। जिन संस्थानों में एक भी लॉगिन नहीं हुआ, उनमें आरएसडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग बेगूसराय और राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय नालंदा (चंडी) सहित कई अन्य शामिल हैं।वहीं कुछ संस्थानों में लॉगिन की स्थिति बेहद खराब है। राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय औरंगाबाद, शेरशाह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग सासाराम और राजकीय पालीटेक्निक कैमूर में छात्र महज 6 से 12 मिनट तक ही लैब का उपयोग कर सके हैं।
लापरवाही और संसाधनों की कमी बनी वजह
समीक्षा में सामने आया कि नोडल अधिकारियों की लापरवाही, छात्रों को प्रेरित नहीं कर पाना, कंप्यूटर सिस्टम का अपडेट नहीं होना और तकनीकी समस्याएं इसके प्रमुख कारण हैं। कई जगहों पर कंप्यूटर लैब क्षतिग्रस्त हैं, तो कहीं अलग से प्रयोगशाला ही उपलब्ध नहीं है। कुछ संस्थानों में एक ही लैब में डिजिटल मूल्यांकन और अन्य गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं, जिससे लैंग्वेज लैब के लिए समय नहीं मिल पा रहा।