सीतामढ़ी जिले के रीगा थाना क्षेत्र स्थित सिंघोरवा गांव के निवासी सौरव चौधरी ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त कर परिवार, गांव और पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। भारतीय सेना के इंजीनियर्स कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त होकर उन्होंने अपने परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
लेफ्टिनेंट सौरव चौधरी ऐसे परिवार से संबंध रखते हैं, जहां देश सेवा की भावना पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके दादा स्वर्गीय सूबेदार चंदेश्वर चौधरी भारतीय सेना की आर्मी मेडिकल कोर में सेवाएं दे चुके हैं और सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके योगदान और अनुशासन की विरासत आज भी परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
पिता भी भारतीय सेना में दे रहे सेवाएं
सौरव के पिता सूबेदार संजीव कुमार वर्तमान में भारतीय सेना की कोर ऑफ सिग्नल्स में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं उनकी माता पूनम चौधरी गृहिणी हैं। परिवार के सैन्य वातावरण और राष्ट्रसेवा के संस्कारों ने बचपन से ही सौरव के व्यक्तित्व को आकार दिया।
परिजनों के अनुसार, सौरव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति को जीवन का लक्ष्य बना लिया था। परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि ने उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी बनने के लिए लगातार प्रेरित किया।
इंजीनियर्स कोर में संभाली जिम्मेदारी
कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर सौरव चौधरी ने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया। अब वह भारतीय सेना के प्रतिष्ठित इंजीनियर्स कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
पूर्व सैनिक संगठन के जिला कार्यकारी अध्यक्ष एवं भारतीय सेना के इंजीनियर्स कोर से सेवानिवृत्त पूर्व सैनिक अनिल कुमार ने सौरव चौधरी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि सौरव की उपलब्धि से युवाओं में राष्ट्रसेवा और सशस्त्र बलों में करियर बनाने की भावना मजबूत होगी। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
लेफ्टिनेंट सौरव चौधरी की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। क्षेत्र के लोग इसे युवा पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।







