मिडिल ईस्ट में शांति समझौते के बीच ईरान ने अपने सबसे संवेदनशील परमाणु भंडार की किलेबंदी कर दी है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने प्रमुख न्यूक्लियर साइटों तक पहुंचने वाली सुरंगों को भी बंद कर दिया है और एंट्री पॉइंट्स पर विस्फोटक माइन्स बिछा दी हैं। माना जा रहा है कि यह वहीं एनरिच्ड यूरेनियम है जिसे लेकर राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि शांति समझौते के बाद इसे अमेरिका को सौंपा जाना चाहिए।
हाल के दिनों में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से संकेत दे रहे थे कि जरूरत पड़ने पर ईरान के यूरेनियम भंडार को जब्त किया जा सकता है। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बदल गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार परमाणु भंडारों की सुरक्षा अब कई गुना बढ़ा दी गई है। ऐसे में इन भंडारों तक पहुंचना किसी के लिए भी लगभग नामुमकिन है।कहां छिपा रखा है यूरेनियम?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने यूरेनियम भंडार का बड़ा हिस्सा मध्य ईरान के ‘इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स’ में छिपा रखा है है। साथ ही कुछ यूरेनियम अन्य भंडारों में भी रखे गये हैं।
मई के महीने में अमेरिकी सेना इन्ही ठिकानों पर हमला करके परमाणु सामग्री जब्त करने वाली थी, लेकिन सुरंगों में जोखिम के चलते उसे मंजूरी नहीं मिली।
अब क्या करेंगे ट्रंप?
इस सुरक्षा अभियान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही न्यूक्लियर वार्ताओं को और जटिल बना दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि संघर्ष समाप्त करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बहाल करने के लिए यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना प्राथमिक लक्ष्य है।अमेरिकी वार्ताकारों का दावा है कि एक समझौता लगभग तैयार है, जिसमें ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंप देगा। इस सामग्री को बेअसर कर देश से बाहर ले जाया जाएगा।
हालांकि दोनों पक्षों के बयानों में अंतर है और शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि अब यूरेनियम निकालना बेहद कठिन है। बड़े पैमाने पर खुदाई और बारूदी सुरंगों को हटाने की जरूरत पड़ेगी, जो ईरान के लिए भी तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।






