कोच्चि के एक रेस्टोरेंट में आम सा लगने वाला खाना एक अनोखी कानूनी लड़ाई में बदल गया है, जिस पर अब पूरे केरल और उसके बाहर भी लोगों का ध्यान जा रहा है।
TOI के मुताबिक, केरल के एक जिले में एक ग्राहक ने दावा किया था कि खाने के साथ उसे ग्रेवी नहीं दी गई, जो कि गलत व्यवहार और ग्राहकों की उम्मीदों का उल्लंघन है। इसके चलते अब यह मामला कोर्ट में पहुंच गया है और कंज्यूमर फोरम इसकी जांच कर रहा है।
कानूनी विवाद बना रेस्टोरेंट का खाना
यह विवाद 9 नवंबर, 2024 का है, जब 58 वर्षीय वकील शिबू एस. वयालकाथ और उनके एक दोस्त कोच्चि के ‘द पर्शियन टेबल’ रेस्टोरेंट गए थे।
दोनों ने केरल का मशहूर कॉम्बिनेश पोरोटा और बीफ फ्राई ऑर्डर किया। खाना तो आ गया, लेकिन उसके साथ आमतौर पर परोसी जाने वाली ग्रेवी नहीं आई।
बताया जाता है कि दोनों ग्राहकों ने ग्रेवी मांगी और रेस्टोरेंट के मालिक से भी इस बारे में बात की। हालांकि, रेस्टोरेंट का कहना था कि उन्होंने जो खास कॉम्बो ऑर्डर किया था, उसमें ग्रेवी शामिल नहीं थी।
ज्यादातर ग्राहकों के लिए मामला शायद वहीं खत्म हो जाता, लेकिन वयालकाथ ने एर्नाकुलम में जिला कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग) में रेस्टोरेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
एक लाख रुपये के मुआवजे की मांग
वयालकाथ ने तर्क दिया कि पोरोटा और बीफ फ्राई के साथ ग्रेवी परोसना पूरे केरल में लंबे समय से चली आ रही और व्यापक रूप से मानी जाने वाली परंपरा है। उन्होंने दावा किया कि ग्रेवी न मिलने से उन्हें मानसिक परेशानी और अपमान का सामना करना पड़ा।वयालकाथ ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही 1 लाख रुपये के मुआवजे और कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये की मांग की।
कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ?
मई 2025 में पोरोटा और बीफ फ्राई को लेकर जब यह मामला जिला कंज्यूमर फोरम पहुंचा, तब इस मामले को खारिज कर दिया गया। आयोग ने कहा, ‘ऑर्डर किए गए खाने के साथ ग्रेवी देने की कोई बाध्यता नहीं थी।’फैसले में कहा गया कि चूंकि रेस्टोरेंट ने खास तौर पर ग्रेवी देने का वादा नहीं किया था, इसलिए सेवा में कोई कमी नहीं थी। हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
जिला कंज्यूमर फोरम के मामले को खारिज करने के बाद वायलाकाथ ने राज्य उपभोक्ता आयोग के सामने इस मामले को चुनौती दी। बाद में राज्य आयोग ने पुराने आदेश को रद कर दिया और जिला फोरम को निर्देश दिया कि वे शिकायत को शुरुआती चरण में ही खारिज करने के बजाय उस पर ठीक से सुनवाई करें।
राज्य आयोग ने एक अहम बात यह कही कि कोई रीति-रिवाज कानूनी रूप से तभी मान्य हो सकता है जब वह एक जैसा हो, लंबे समय से चला आ रहा हो और जिसे आम लोग और बिजनेस, दोनों ही बड़े पैमाने पर मानते हों।
आयोग ने कहा कि यह पता लगाने के लिए सबूतों की जरूरत होगी कि क्या परोटा और बीफ फ्राई के साथ ग्रेवी परोसने का कोई ऐसा रिवाज मौजूद था। अब इस मामले पर 8 जुलाई को फिर से सुनवाई होनी है।





