भरत तिवारी एनकाउंटर केस के बाद बढ़ीं पूर्व SDPO राजेश शर्मा की मुश्किलें, मुजफ्फरपुर का 19 साल पुराना विवाद फिर चर्चा में

भोजपुर के जगदीशपुर में हुए चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में पद से हटाए गए पूर्व एसडीपीओ राजेश शर्मा की परेशानियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। आरा में हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब उनके पुलिस सेवा के दौरान मुजफ्फरपुर से जुड़े करीब 19 वर्ष पुराने विवादित मामलों की भी दोबारा चर्चा शुरू हो गई है।

1994 बैच के दारोगा के रूप में पुलिस सेवा में शामिल हुए राजेश शर्मा बाद में पदोन्नति पाकर एसडीपीओ बने। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने मुजफ्फरपुर जिले में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे सदर और ब्रह्मपुरा थाना के थानाध्यक्ष रहने के साथ-साथ सरैया अनुमंडल में एसडीपीओ के पद पर भी तैनात रह चुके हैं।

चतुर्भुज स्थान मुठभेड़ से पहली बार आए थे सुर्खियों में

मुजफ्फरपुर में तैनाती के दौरान राजेश शर्मा पहली बार उस समय चर्चा में आए थे, जब करीब दो दशक पहले शहर के चर्चित चतुर्भुज स्थान रेडलाइट इलाके में एक नर्तकी के कोठे पर पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में एक बदमाश की मौत हो गई थी, जबकि राजेश शर्मा स्वयं भी गोली लगने से घायल हुए थे।

इस मुठभेड़ के बाद उनका नाम पुलिस महकमे और मीडिया में प्रमुखता से सामने आया था। हालांकि इसके कुछ वर्षों बाद एक और एनकाउंटर ने उनकी कार्यशैली और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

MIT के समीप हुए एनकाउंटर पर उठे थे सवाल

यह मामला 4 नवंबर 2007 की सुबह लगभग चार बजे का है। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित एमआईटी कॉलेज के समीप पुलिस और युवकों के बीच हुई कथित मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत हो गई थी।

मृतकों की पहचान सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर पताही निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा उर्फ मनीष महिवाल तथा शिवहर जिले के धनकौल निवासी सुबोध कुमार सिंह के रूप में हुई थी।

उस समय पुलिस ने दावा किया था कि वाहन जांच अभियान के दौरान संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया गया, जिसके बाद युवकों ने पुलिस टीम पर 22 राउंड फायरिंग कर दी। पुलिस के अनुसार आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें तीनों युवक मारे गए।

मानवाधिकार आयोग ने जांच प्रक्रिया पर उठाए थे प्रश्न

मुठभेड़ के बाद मृतकों के परिजनों ने पूरे घटनाक्रम को फर्जी एनकाउंटर करार दिया था। मामला बढ़ने पर तत्कालीन डीआईजी के निर्देश पर सीआईडी जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में संबंधित पुलिस अधिकारियों और जवानों को क्लीन चिट दे दी गई थी।

हालांकि बाद में मानवाधिकार आयोग ने सीआईडी जांच और दाखिल चार्जशीट पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं। इसके बाद वर्ष 2013 में मुजफ्फरपुर की अदालत में तत्कालीन सदर थानेदार राजेश शर्मा सहित चार थाना प्रभारियों और कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।

बताया जाता है कि गवाहों के अभाव और अन्य कानूनी कारणों से यह मामला लंबे समय तक लंबित बना रहा। अब भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले के बाद राजेश शर्मा से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर सार्वजनिक और कानूनी बहस का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।#RajeshSharma #BharatTiwariEncounter #BhojpurNews #AraNews #MuzaffarpurNews #BiharPolice #EncounterCase #HumanRightsCommission #CIDInvestigation #BiharCrimeNews

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