देश के कई हिस्सों में रसेल वाइपर (Russell’s Viper) जैसे अत्यंत विषैले सांप के आबादी वाले क्षेत्रों में दिखाई देने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। पहले यह सांप मुख्य रूप से जंगलों, खेतों और नदी-नालों के आसपास देखा जाता था, लेकिन अब इसके रिहायशी इलाकों में भी पहुंचने के मामले सामने आ रहे हैं।
जानकारों के अनुसार, रसेल वाइपर भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है। खतरा महसूस होने पर यह जोरदार फुफकार (हिसिंग) की आवाज निकालता है, जिसे कई लोग गलती से सीटी जैसी आवाज समझ लेते हैं। यदि ऐसा सांप दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे पकड़ने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
स्थानीय व्यवसायी अशोक मोदनवाल बताते हैं कि करीब एक दशक पहले गनेशपुर कस्बे में लोगों ने एक ऐसे सांप को पकड़ा था, जिसकी तेज फुफकार काफी दूर तक सुनाई दे रही थी। उनके अनुसार, सांप का रंग हल्का पीला था और उसके शरीर पर काले रंग के अंडाकार या गोलाकार निशान बने हुए थे, जो रसेल वाइपर की पहचान से मेल खाते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सांप की पहचान केवल बाहरी बनावट या आवाज के आधार पर निश्चित रूप से नहीं की जानी चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में विषैला सांप दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग, स्थानीय स्नेक रेस्क्यू टीम या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दें। स्वयं उसे पकड़ने या मारने का प्रयास करना खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि घरों और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखें, झाड़ियों और कचरे का जमाव न होने दें तथा रात के समय बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें। सतर्कता और समय पर सूचना ही ऐसे मामलों में सबसे प्रभावी बचाव है।#RussellsViper #SnakeAlert #Wildlife #SnakeRescue #ForestDepartment #IndiaNews #WildlifeNews #SafetyTips #HindiNews #BreakingNews








