हमीरपुर जनपद के सुमेरपुर क्षेत्र से एक पर्यावरण प्रेमी ने गायत्री गंगा नदी की आवाज उठाई। एनजीटी को इसके संरक्षण और प्रदूषण को लेकर शिकायत भेजी। एनजीटी ने पर्यावरण प्रेमी की शिकायत के बाद नौ विभागों को तलब कर लिया है।
जनपद के सुमेरपुर क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली गायत्री गंगा नदी के संरक्षण और प्रदूषण को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कस्बा निवासी राजेश शिवहरे की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को संज्ञान में लिया है। कस्बे के स्टेशन रोड निवासी आवेदक राजेश शिवहरे की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि गायत्री गंगा नदी लगभग 50 किलोमीटर लंबी एक प्राकृतिक जलधारा है, जो जनपद हमीरपुर के ग्राम छानी से निकलती है। यह नदी कई गांवों से होकर बहती हुई महोबा जनपद से निकलने वाली चंद्रावल नदी में मिलती है तथा चंद्रावल नदी केन नदी में मिलते हुए बांदा जनपद के चिल्ला घाट में यमुना नदी पर समाहित हो जाती है।गंगा नदी की महत्वपूर्ण हिस्सा गायत्री गंगा नदी
इस प्रकार यह गायत्री गंगा नदी पावन व पवित्र गंगा नदी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और क्षेत्रीय जल संतुलन एवं पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक है। याचिका में आरोप लगाया गया कि गायत्री गंगा नदी में बिना उपचारित सीवेज (गंदा पानी) का सीधे निस्तारण किया जा रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। इतना ही नहीं नदी में जगह-जगह अतिक्रमण किया गया है। जिसपर अधिकरण ने प्रथम दृष्टया इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए मामले की सुनवाई स्वीकार की।
नदी के संरक्षण की उम्मीद जगी
मामले की सुनवाई एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य डा.ए.सेंथिल वेल की पीठ के समक्ष हुई। आवेदक एवं प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण संवैधानिक दायित्व है और किसी भी प्रकार का प्रदूषण या अतिक्रमण पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है। जिससे एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख आगामी नौ मार्च 2026 निर्धारित की है। जिसमें संबंधित नौ विभागों को तलब होने के आदेश दिए गए हैं। एनजीटी द्वारा इस मामले में संज्ञान लिया जाना क्षेत्रवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल गायत्री गंगा नदी के संरक्षण की उम्मीद जगी है, बल्कि भविष्य में प्रदूषण पर प्रभावी रोक और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी।
इन नौ विभागों को तलब होने का दिया गया आदेश
पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय दिल्ली, उत्तर प्रदेश राज्य मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बांदा, जिला मजिस्ट्रेट हमीरपुर, खंड विकास अधिकारी सुमेरपुर, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत सुमेरपुर, जलशक्ति मंत्रालय एवं जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार विभाग नई दिल्ली व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली।
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