देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल से मौतों का आंकड़ा 15 तक पहुंच चुका है, जबकि इस पूरे मामले में अब एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जानकारी के अनुसार, दो साल पहले ही एक भाजपा पार्षद ने जर्जर पेयजल पाइपलाइनों को बदलने की चेतावनी दी थी, लेकिन नगर निगम ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
इंदौर के वार्ड नंबर-11 से भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने नगर निगम को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल की पाइपलाइनें बेहद पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया।
जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2022 में हुए इंदौर नगर निगम चुनावों में भाजपा की जीत के लगभग एक साल बाद ही कमल वाघेला ने अपने वार्ड में पेयजल व्यवस्था की खामियों को चिन्हित कर लिया था। उन्होंने समय रहते पाइपलाइन बदलने की मांग की थी, लेकिन यह फाइलें सिस्टम की धूल में दबती चली गईं।
भाजपा पार्षद ने दो साल पहले दी थी चेतावनी
अब इस मामले को लेकर भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने शुक्रवार, 2 जनवरी को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर नगर निगम अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बार-बार पाइपलाइन बदलने का अनुरोध किया, लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया, जिसका खामियाजा आज जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
इस खुलासे के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष के साथ-साथ आम नागरिक भी अब यह पूछ रहे हैं कि अगर समय रहते चेतावनी पर कार्रवाई होती, तो क्या 15 लोगों की जान बचाई जा सकती थी?#IndoreWaterCrisis #IndoreNews #WaterContamination #MunicipalNegligence #BJPParshad #PublicHealthCrisis #MadhyaPradeshNews