पॉक्सो केस में अहम फैसला: गवाही के बाद पीड़िता को दोबारा नहीं बुलाया जा सकता—कलकत्ता हाई कोर्ट

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक मामले में जिला अदालत के आदेश को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार गवाही दर्ज हो जाने के बाद पीड़िता को दोबारा अदालत में तलब नहीं किया जा सकता, क्योंकि कानून पीड़िता को सम्मान, गरिमा और मानसिक सुरक्षा प्रदान करता है।

अदालत ने कहा कि पॉक्सो कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ित बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा करना भी है।

कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से जुड़ा है, जहां एक नाबालिग लड़की के लापता होने की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि उसे यौन शोषण के उद्देश्य से बेच दिया गया था

मामले में गिरफ्तार आरोपित पर पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप है। पुलिस ने इस मामले में अपहरण, मानव तस्करी, दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।

सुनवाई के दौरान जिला अदालत ने दो दिनों तक पीड़िता के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान आरोपित के वकील को भी जिरह (Cross Examination) का पूरा अवसर दिया गया था।

हालांकि, लगभग पांच महीने बाद आरोपित के वकील ने जिला अदालत में एक याचिका दाखिल कर दावा किया कि पहले उनके कनिष्ठ वकील ने जिरह की थी और कुछ अहम सवाल पूछना भूल गए थे, इसलिए पीड़िता को दोबारा बुलाया जाए।

इस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसी मांग पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात पहुंचा सकती है, जो कानून की भावना के खिलाफ है। इसी आधार पर जिला अदालत का आदेश रद्द कर दिया गया।#PocsoAct #CalcuttaHighCourt #ChildRights #JusticeForVictim #LegalNewsIndia #WomenSafety #POSH #CourtVerdict

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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