मनमाने ढंग से एंटीबायोटिक (Antibiotic) दवा लेने की आदत हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। इसे विशेषज्ञ साइलेंट किलर कह रहे हैं, क्योंकि यह शरीर के जीन में बदलाव कर जानलेवा स्थितियों तक पहुंचा सकता है। इसी कारण दुनिया भर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के मामलों में भारत शीर्ष स्थान पर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे देश में एंटीबायोटिक दवा पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। जबकि कई विकसित देशों में यह सुनिश्चित किया जाता है कि एंटीबायोटिक दवा सिर्फ डाक्टर की निगरानी और कल्चर जांच के बाद ही दी जाए। इसके विपरीत, भारत में सामान्य बुखार, जुकाम और खांसी जैसी मामूली बीमारियों में भी लोग एंटीबायोटिक दवा लेने की प्रथा अपनाते हैं।
डा. विकास मिश्रा, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, जीएसवीएम मेडिकल कालेज, ने जागरण संवाददाता अंकुश शुक्ल को बताया कि इस स्थिति में हम स्वयं भी जिम्मेदार हैं। अक्सर लोग बिना डाक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा लेकर सेवन करते हैं, जिससे शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति उत्पन्न होती है। यह साइलेंट किलर भविष्य में रिजर्व एंटीबायोटिक को बेअसर कर गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है।
डा. मिश्रा का सुझाव है कि हमें भविष्य के लिए सचेत होकर एंटीबायोटिक दवा का प्रयोग करना चाहिए। केवल आवश्यक होने पर, चिकित्सक की सलाह से ही एंटीबायोटिक दवा लेनी चाहिए, ताकि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता सुरक्षित रहे और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर नियंत्रण पाया जा सके।#एंटीबायोटिकरेजिस्टेंस #साइलेंटकिलर #स्वास्थ्यजागरूकता #डॉक्टरसलाह #भविष्यकासुरक्षा #मेडिकलस्टोर #रोगप्रतिरोधकशक्ति