पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में बुधवार को यह संकल्प लिया गया कि विधानसभाओं में एक वर्ष में कम से कम 30 बैठकें आयोजित की जाएं। हालांकि, प्रदेश में पहले से ही नियम है कि सदन को साल में 90 दिन चलना चाहिए।
वास्तविकता यह है कि किसी भी राजनीतिक दल की सरकार रही हो, इस नियम का पालन कभी नहीं हुआ। 18वीं विधानसभा के दौरान वर्ष 2023 में सदन की अधिकतम 20 दिन बैठकें हुईं। अन्य वर्षों में यह संख्या घटकर 15 से 17 दिन तक ही सीमित रही।
इस स्थिति ने विधानसभा की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदन नियमित रूप से निर्धारित दिनों तक चले तो न केवल जनहित के मुद्दों पर गहन चर्चा हो सकेगी, बल्कि सरकार की नीतियों और कार्यों की भी बेहतर समीक्षा संभव होगी।
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