जम्मू-कश्मीर प्रदेश सरकार ने श्रीनगर में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और माननीयों के लिए एक नई आवासीय कॉलोनी विकसित करने की योजना के तहत अलूचीबाग क्षेत्र में स्थित करीब दो सौ साल पुरानी शहतूत (Mulberry) नर्सरी की भूमि को चिन्हित किया है। यह नर्सरी लंबे समय से रेशम उद्योग और सेरीकल्चर गतिविधियों का अहम केंद्र रही है।
सरकार के इस फैसले पर सेरीकल्चर विभाग और रेशम कीट पालन से जुड़े किसानों ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि प्रस्तावित आवासीय परियोजना न केवल जम्मू-कश्मीर के रेशम उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि यह प्रदेश की एक ऐतिहासिक और पारंपरिक विरासत के विनाश का कारण भी बनेगी।
किसानों और विशेषज्ञों का तर्क है कि यह शहतूत नर्सरी रेशम कीट पालन की रीढ़ रही है और इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में इस भूमि का उपयोग बदलने का निर्णय भविष्य में सेरीकल्चर सेक्टर पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।