सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मणिपुर में जातीय हिंसा के पीड़ितों की राहत और पुनर्वास की देखरेख के लिए गठित जस्टिस गीता मित्तल समिति का कार्यकाल 31 जुलाई तक बढ़ा दिया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह निर्णय उस समय लिया, जब उन्हें सूचित किया गया कि समिति का कार्यकाल पिछले साल जुलाई में समाप्त हो चुका था।
सूचना के अनुसार, समिति ने अब तक पीड़ितों के पुनर्वास से संबंधित 42 रिपोर्टें सुप्रीम कोर्ट को सौंपी हैं। यह समिति सात अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई थी, जिसमें हाईकोर्ट की तीन पूर्व महिला जजों को पीड़ितों की राहत, पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था।
साथ ही, महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पद्सलगीकर को आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी का निर्देश दिया गया था। समिति को सुप्रीम कोर्ट को सीधे रिपोर्ट पेश करने का अधिकार भी प्राप्त है।
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली इस समिति में बांबे हाईकोर्ट की पूर्व जज शालिनी पी. जोशी और दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज आशा मेनन भी शामिल हैं।ManipurViolence
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