उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति विवादों और फर्जीवाड़े से बचाव के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गुरुवार को संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार-आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय को राज्य में जमीन से जुड़े घोटालों और नकली रजिस्ट्रेशन की समस्या को रोकने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होगी। अब किसी भी व्यक्ति की संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान आधार कार्ड के माध्यम से उसकी पहचान की पुष्टि की जाएगी। इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की जाने वाली रजिस्ट्री पर रोक लगेगी और धोखाधड़ी की संभावनाएं काफी हद तक कम हो जाएंगी।
स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने बताया कि इस फैसले की नींव बीते वर्ष 28 अगस्त को रखी गई थी, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग की समीक्षा बैठक में आधार प्रमाणीकरण को लागू करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम आगामी 1 फरवरी से प्रदेश के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लागू कर दिया जाएगा।
आधार प्रमाणीकरण से क्या होगा फायदा?
- फर्जीवाड़े पर रोक: नकली पहचान और दस्तावेजों के जरिए की जाने वाली रजिस्ट्री अब संभव नहीं होगी।
- पारदर्शिता में वृद्धि: हर रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार से जुड़ा सत्यापन होगा, जिससे प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
- जमीन घोटालों पर अंकुश: लंबे समय से चल रहे जमीन से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।
- जनता को राहत: आम नागरिकों को संपत्ति खरीदने-बेचने में अधिक सुरक्षा और भरोसा मिलेगा।
सरकार की मंशा
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि संपत्ति से जुड़े लेन-देन को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी पारदर्शिता बढ़ेगी। जमीन से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने से न्यायालयों पर भी बोझ घटेगा।
तकनीकी प्रक्रिया
आधार-आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम के तहत जब कोई व्यक्ति संपत्ति की रजिस्ट्री कराने जाएगा, तो उसकी पहचान आधार कार्ड के माध्यम से सत्यापित की जाएगी। यह प्रक्रिया बायोमेट्रिक या ओटीपी आधारित होगी। सत्यापन के बाद ही रजिस्ट्री आगे बढ़ेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति वही है, जिसका नाम दस्तावेजों में दर्ज है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में संपत्ति प्रबंधन और रजिस्ट्री प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। यदि यह व्यवस्था सफल होती है, तो अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की संभावना है।
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