बगहा न्यायालय ने गुरुवार को करीब 27 वर्ष पुराने अपहरण मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित था, जिस पर अब अंतिम निर्णय आया है।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र की अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है, जो इस प्रकरण में नहीं किया जा सका।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 12 जून 1999 को पारस यादव ने गोबर्धना थाना में कांड संख्या 14/99 दर्ज कराया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटी गायत्री की शादी तीन वर्ष पूर्व सुरेश यादव से हुई थी, हालांकि उस समय गौना नहीं हुआ था।
इसी मामले को लेकर अपहरण का आरोप लगाया गया था, जिसकी सुनवाई वर्षों तक चली। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया।BagahaCourt
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