जमुई-चकाई वन क्षेत्र में पैंगोलिन की संख्या में भारी गिरावट
बिहार के जमुई जिले के अंतर्गत आने वाले जमुई और चकाई वन प्रक्षेत्र में पैंगोलिन (Pangolin) की आबादी में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में इनकी संख्या में 80 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जो पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर संकेत है।
38 से घटकर रह गए सिर्फ 8 पैंगोलिन
वन विभाग के मुताबिक वर्ष 2018 में जमुई वन क्षेत्र के खैरा प्रखंड और चकाई वन प्रक्षेत्र के सिमुलतला व बटिया जंगलों में कुल 38 पैंगोलिन मौजूद थे।
हालांकि, इस वर्ष पदचिह्नों और साइलेंट ट्रैपिंग कैमरों से प्राप्त तस्वीरों के आधार पर इनकी संख्या घटकर मात्र 8 रह गई है।
जिला वन पदाधिकारी ने इसे “खतरे की घंटी” बताते हुए कहा कि इतनी तेजी से घटती आबादी वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती है।
बिहार के सीमित क्षेत्रों में ही मौजूदगी
राज्य में पैंगोलिन की उपस्थिति अब बेहद सीमित हो गई है। यह प्रजाति केवल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, सासाराम, कैमूर, किशनगंज और जमुई जैसे कुछ क्षेत्रों में ही देखी जाती है।
केंद्र सरकार ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 2022 के तहत इसे दुर्लभ जीव की श्रेणी में शामिल किया है, जिससे इसके संरक्षण की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
अनूठा स्तनधारी, खतरे में अनोखी प्रजाति
पैंगोलिन एक बेहद अनोखा स्तनधारी जीव है, जिसके शरीर पर केराटिन से बने मजबूत शल्क होते हैं। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा स्तनधारी है, जो खतरे का आभास होने पर अपने शरीर को गेंद की तरह गोल कर लेता है।
यह मुख्य रूप से निशाचर (रात में सक्रिय) जीव है और चींटियों व दीमकों को खाकर उनकी आबादी नियंत्रित करता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है।
धीमी प्रजनन दर और शिकार बना बड़ा खतरा
वन विभाग के अनुसार, पैंगोलिन की प्रजनन दर बेहद धीमी होती है, जिससे इनकी संख्या तेजी से नहीं बढ़ पाती। इसके साथ ही अवैध शिकार और तस्करी भी इनकी घटती आबादी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह दुर्लभ जीव आने वाले समय में पूरी तरह विलुप्ति के कगार पर पहुंच सकता है।Pangolin #WildlifeCrisis #Jamui #BiharNews #EndangeredSpecies #ForestDepartment #Environment