ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में पर्यावरण संरक्षण और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से जुड़े एमसी मेहता मामलों के 40 वर्षों से लंबित रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को स्पष्ट संकेत दिया कि अब इन मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित दिखाना स्वीकार्य नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पीठ ने कहा कि जिन मामलों का निस्तारण वर्षों पहले हो चुका है, उन्हें विभिन्न अंतरिम आवेदनों (IA) और विविध आवेदनों (MA) के आधार पर जीवित और लंबित दिखाना उचित नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि अब इस स्थिति को समाप्त किया जाएगा।
मामलों का इतिहास अधिवक्ता एमसी मेहता ने वर्ष 1984 में ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद 1985 में उन्होंने दिल्ली-एनसीआर को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कीं। मूल विवादों का निर्णय वर्षों पूर्व हो चुका है, लेकिन समय-समय पर नए अंतरिम आवेदन दाखिल होने से ये मामले रिकॉर्ड में अभी भी लंबित दर्शाए जा रहे हैं।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने इन मामलों की सुनवाई की और स्पष्ट किया कि अदालत अब इस तरह की स्थिति को स्वीकार नहीं करेगी।#SupremeCourt #MCMehtaCase #TajTrapeziumZone #AirPollution #DelhiNCR