नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग में किए गए एक महत्वपूर्ण शोध ने पशुचिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा दी है। इस शोध के तहत पक्षियों के कटे या क्षतिग्रस्त पंखों को दोबारा जोड़ने की प्रभावी तकनीक विकसित की गई है, जिसे अब तक बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण माना जाता था।
पक्षियों की शारीरिक संरचना अत्यंत नाजुक होती है और उनकी हड्डियां हल्की होने के कारण सर्जरी करना विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में इस जटिल समस्या का समाधान विभाग के पीजी छात्र डॉ. अनिकेत त्यागी ने अपने शोध के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
शोध के दौरान उन्होंने मांझे से गंभीर रूप से घायल एक तोते के पंख की हड्डी को सफलतापूर्वक जोड़ने में कामयाबी हासिल की। यह सर्जरी 25 नवंबर 2025 को की गई, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक और सावधानी का विशेष ध्यान रखा गया।
सर्जरी से पहले पक्षी को सुरक्षित रूप से बेहोश किया गया, ताकि प्रक्रिया के दौरान उसे किसी प्रकार का दर्द या तनाव न हो। इसके बाद पंख की टूटी हुई हड्डी को एक छोटी धातु की पिन के माध्यम से स्थिर किया गया। इस तकनीक को ‘इंट्रामेडुलरी पिनिंग’ कहा जाता है, जिसमें हड्डी के भीतर पिन डालकर उसे सही स्थिति में जोड़ा जाता है।
यह सफलता न केवल पशुचिकित्सा विज्ञान में एक बड़ा कदम है, बल्कि भविष्य में घायल पक्षियों के उपचार और पुनर्वास के लिए नई संभावनाएं भी खोलती है। इस तकनीक के जरिए अब ऐसे कई पक्षियों को नया जीवन दिया जा सकेगा, जो अब तक स्थायी रूप से उड़ने की क्षमता खो देते थे।नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग में किए गए एक महत्वपूर्ण शोध ने पशुचिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा दी है। इस शोध के तहत पक्षियों के कटे या क्षतिग्रस्त पंखों को दोबारा जोड़ने की प्रभावी तकनीक विकसित की गई है, जिसे अब तक बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण माना जाता था।
पक्षियों की शारीरिक संरचना अत्यंत नाजुक होती है और उनकी हड्डियां हल्की होने के कारण सर्जरी करना विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में इस जटिल समस्या का समाधान विभाग के पीजी छात्र डॉ. अनिकेत त्यागी ने अपने शोध के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
शोध के दौरान उन्होंने मांझे से गंभीर रूप से घायल एक तोते के पंख की हड्डी को सफलतापूर्वक जोड़ने में कामयाबी हासिल की। यह सर्जरी 25 नवंबर 2025 को की गई, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक और सावधानी का विशेष ध्यान रखा गया।
सर्जरी से पहले पक्षी को सुरक्षित रूप से बेहोश किया गया, ताकि प्रक्रिया के दौरान उसे किसी प्रकार का दर्द या तनाव न हो। इसके बाद पंख की टूटी हुई हड्डी को एक छोटी धातु की पिन के माध्यम से स्थिर किया गया। इस तकनीक को ‘इंट्रामेडुलरी पिनिंग’ कहा जाता है, जिसमें हड्डी के भीतर पिन डालकर उसे सही स्थिति में जोड़ा जाता है।
यह सफलता न केवल पशुचिकित्सा विज्ञान में एक बड़ा कदम है, बल्कि भविष्य में घायल पक्षियों के उपचार और पुनर्वास के लिए नई संभावनाएं भी खोलती है। इस तकनीक के जरिए अब ऐसे कई पक्षियों को नया जीवन दिया जा सकेगा, जो अब तक स्थायी रूप से उड़ने की क्षमता खो देते थे।#VeterinaryScience #BirdSurgery #AnimalCare #ResearchIndia #Innovation