कई बार ऊपर से साफ और सुंदर दिखने वाला फल काटने पर अंदर से सड़ा या कच्चा निकल जाता है। दुकान से अच्छा फल खरीदकर लाने वाले ग्राहक फल खराब निकलने पर खुद को ठगा हुआ सा महसूस करते हैं। कई बार बड़े फल कारोबारियों के लिए भी फलों की गुणवत्ता जांच करना मुश्किल हो जाता है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाता है।
इस समस्या के समाधान के लिए विद्यार्थियों के सुझाने पर शंभू दयाल ग्लोबल स्कूल दयानंद नगर के शिक्षक तेजस मिश्रा ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिसमें फल को रखने पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह जानकारी मिल सकेगी कि यह फल अंदर से खराब है या ठीक।सॉफ्टवेयर का पेटेंट कराया गया
ठीक है तो कितने प्रतिशत और फल में खराबी क्या है। फल पका हुआ है या नहीं है। कितने दिन तक फल को खाया जा सकता है आदि जानकारी मिल सकेंगी। इलेक्ट्राॅनिक कांपोनेंट्स, मशीन लर्निंग एवं एआई के इस्तेमाल से तैयार किए गए उपकरण और साॅफ्टवेयर को आईपीओ द्वारा 20 साल के लिए पेटेंट हो गया है।पेटेंट मिलने के बाद अब इसे व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल के लिए विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। तेजस का कहना है कि डिवाइस में फल को एक विशेष स्कैनिंग प्लेटफाॅर्म पर रखा जाता है। इसके बाद उससे जुड़ा मोबाइल ऐप फल की आंतरिक गुणवत्ता का विश्लेषण कर विस्तृत रिपोर्ट देता है।
सॉफ्टवेयर में विभिन्न फलों का डेटा फीड है
डिवाइस यह बताने में सक्षम है कि फल कितने प्रतिशत तक ताजा है, उसमें किस प्रकार की खराबी है, वह पूरी तरह पका है या नहीं, और उसे कितने दिनों तक सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है। इसके लिए साॅफ्टवेयर में विभिन्न फलों के हजारों नमूनों का डेटा फीड किया गया है।
मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म इस डेटा के आधार पर पैटर्न पहचानता है और सटीक अनुमान प्रस्तुत करता है। यह उपकरण भविष्य में मंडियों, सुपरमार्केट और फलों के निर्यात कारोबार में विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है। इससे गुणवत्ता नियंत्रण आसान होगा और खाद्य अपव्यय में भी कमी आएगी।