नई दिल्ली। मानसून के दौरान बिजली गिरने से रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन और बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की समस्या को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। अब देशभर के रेल नेटवर्क में अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस ‘लाइटनिंग अरेस्टर’ लगाए जाएंगे, जिससे बिजली गिरने की स्थिति में OHE लाइन ट्रिप होने और बिजली सब-स्टेशनों को नुकसान पहुंचने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।
रेलवे द्वारा अपनाई जा रही नई व्यवस्था के तहत ‘गैपलेस टाइप नॉन-लीनियर मेटल ऑक्साइड रेसिस्टर’ तकनीक आधारित लाइटनिंग अरेस्टर में डिस्कनेक्टर असेंबली जोड़ी जाएगी। यह तकनीक बिजली गिरने से उत्पन्न होने वाले उच्च वोल्टेज को नियंत्रित कर विद्युत उपकरणों को सुरक्षित रखने में मदद करेगी।
इसके साथ ही भारतीय रेलवे पहली बार अपने सभी बिजली सब-स्टेशनों पर थर्मोविजन कैमरों के माध्यम से निगरानी व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य बिजली उपकरणों की स्थिति पर लगातार नजर रखना और संभावित खराबी का समय रहते पता लगाना है।
थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस विशेष कैमरों की सहायता से प्रत्येक तीन महीने में बिजली सब-स्टेशनों का निरीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान यदि कोई उपकरण सामान्य से अधिक गर्म होता हुआ दिखाई देता है, तो उसे संभावित खराबी या दुर्घटना से पहले ही बदल दिया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इससे उपकरणों के अचानक फेल होने, शॉर्ट सर्किट, ब्लास्ट या अन्य तकनीकी समस्याओं की आशंका कम होगी। साथ ही ट्रेन संचालन को प्रभावित करने वाली विद्युत बाधाओं पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रेलवे की विद्युत सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करेगा। मानसून के दौरान बिजली गिरने से होने वाली तकनीकी दिक्कतों में कमी आने से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और निर्बाध हो सकेगा।
रेलवे की यह पहल न केवल यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि विद्युत अवसंरचना के रखरखाव और संचालन की लागत को भी कम करने में सहायक साबित हो सकती है।
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