धौलाना, अमरोहा और अब जयपुर… जमानत पर छूटने के बाद भी बिछा दी 8 लाशें, हापुड़ के वसीम का ‘खूनी खेल’ जारी

 धौलाना में 2022 में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट भले ही 13 लोगों की मौत हुई हो, लेकिन इस गुनाह के आरोपित को कोई पछतावा नहीं है। कानून की कमजोरी का फायदा उठाकर वह फिर उसी धंधे को करने लगा, जिससे पहले 13 परिवारों में मौत का मातम पसरा था। वह एक-एक कर तीन घटनाओं में आराेपित के रूप में सामने आ चुका है।

क्या है पूरा मामला?

बात हो रही है, हापुड़ के रहने वाले वसीम की। वह धौलाना में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में जेल गया था, लेकिन ज्यादा समय तक अंदर नहीं रह सका। दरअसल विस्फोटक अधिनियम के कानून में कड़ा प्रावधान नहीं होने के चलते वह सलाखों से बाहर आया और फिर वही मौत का धंधा आरंभ कर दिया। धौलाना के बाद उसका नाम अमरोहा के अतरासी में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में सामने आया। अब जयपुर में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में भी पुलिस को उसकी तलाश है।जयपुर के खो-नागोरियान इलाके में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में आठ लोगों की मौत के बाद हापुड़ पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। इस मामले में सामने आए मुख्य आरोपित मोहम्मद वसीम का संबंध हापुड़ से जुड़ा होने के कारण जिले की खाकी उसकी गतिविधियों और नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई है।पुलिस खंगाल रही नेटवर्क

वसीम का नाम इससे पहले धौलाना के 2022 के फैक्ट्री विस्फोट और अमरोहा के अतरासी में हुए विस्फाेट में भी सामने आ चुका है। जिससे अवैध पटाखा और विस्फोटक कारोबार के पुराने तार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। जयपुर हादसे में आठ लोगों की मौत के बाद जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क और सहयोगियों की भूमिका खंगाल रही हैं।

धौलाना क्षेत्र में 2022 में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई थी। उस मामले में वसीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हालांकि विस्फोटक अधिनियम में अपेक्षाकृत कमजोर दंडात्मक प्रावधानों और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उसे एक साल बाद ही जमानत मिल गई।

जेल से बाहर आने के बाद उसने अवैध पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के कारोबार से दूरी बनाने के बजाय फिर उसी नेटवर्क को सक्रिय कर लिया। धौलाना कांड के बाद अमरोहा जिले के अतरासी क्षेत्र में हुई पटाखा फैक्ट्री विस्फोट की घटना में भी उसका नाम सामने आया था। अब जयपुर के खो-नागोरियान इलाके में हुए विस्फोट में आठ लोगों की जान गई है। उसमें भी जांच एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं।

लगातार तीन बड़े विस्फोट मामलों में एक ही नाम का सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जयपुर हादसे के बाद हापुड़ पुलिस भी सतर्क हो गई है। स्थानीय स्तर पर वसीम के संपर्कों, उसके नेटवर्क और विस्फोटक सामग्री के कारोबार से जुड़े संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस सूत्रों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में भी इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।

अवैध पटाखा निर्माण और विस्फोटक पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए केवल तत्कालिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि कानून में भी कठोर प्रावधानों की आवश्यकता है। एक बार हुई लापरवाही की कीमत कई परिवार अपनी जान देकर चुका चुके हैं। अब जयपुर की घटना ने एक बार फिर उसी दर्दनाक सच को सामने ला दिया है। – कमल सिंह – पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता।

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